मंगल ग्रह या मंगल ज्योतिष के अनुसार बिजली, ताकत, साहस और आक्रामकता का ग्रह है |ज्योतिष की दृष्टि से मंगल ग्रह को एक क्रूर ग्रह के रूप में देखा जाता है, तथा मंगल ग्रह को भगवान के रूप में माना जाता है | मंगल ग्रह आकाश में लाल रंग के खगोलीय शरीर के साथ वर्णित है | मंगल ग्रह के प्रकृति के वर्णन में उसे क्षत्रिय माना गया है, एक सुंदर और छोटे कद का व्यक्तित्व लिए है जिसके चार हाथ है जिनमे वह हथियार लिए है | शादी के संदर्भ में मंगल ग्रह की स्थिति का सर्वोच्च महत्व है क्योंकि यह आक्रामकता का प्रतीक है | पति, वैवाहिक गांठ, लिंग आदि में मंगल की स्थिति प्रभावित करती है | मंगल ग्रह विवाह की सकारात्मक या नकारात्मक स्थिति को प्रभावित करने के लिए जाना जाता है | मंगल दोष एक ज्योतिषीय स्थिति है जो तब होता है यदि वैदिक ज्योतिष के जन्मांग चक्र के 1, 4, 7, 8 और 12वे घर में मंगल हो |
ऐसी स्थिति में पैदा हुआ जातक मांगलिक कहा जाता है | यह स्थति विवाह के लिए अत्यंत विनाशकारी मानी गयी है | संबंधो में तनाव, कार्य में असुविधा तथा नुक्सान और व्यक्ति की असामायिक मृत्यु का कारण मंगल को माना गया है | मंगल पूजा के द्वारा मंगल ग्रह को प्रसन्न किया जाता है,तथा उसके विनाशकारी प्रभावों को नियंत्रित किया जाता है, तथा सकारात्मक प्रभावों को बढ़ाया जाता है |

मंगलनाथ मंदिर परिसर, उज्जैन
मंगलनाथ मंदिर, उज्जैन के शोर-शराबे से दूर , क्षिप्रा नदी के विस्तार तट में स्थित है, जो पर्यटकों तथा भक्तो को एक अविस्मर्णीय भावना प्रदान करता है | यह मंदिर उस स्थान पर स्थित है जहा कभी पृथ्वी का मध्यान कहा गया था | इसलिए यह स्थान ग्रहों की स्थति के अध्ययन के लिए प्रसिद्ध तथा उपुक्त माना गया है | मंगलनाथ मंदिर, मध्य प्रदेश की दिव्य नगरी उज्जैन में स्थित है | मत्स्य पुराण के अनुसार मंगलनाथ परिसर को मंगल का जन्म स्थान माना गया है | प्रभु मंगल के इष्टदेव भगवान शिव है | यह परिसर अपने दैवीय गुणों के कारण अत्यंत प्रसिद्ध है |

परिसर स्थिति
मंगलनाथ मंदिर उज्जैन की आबादी और हलचल से दूर स्थित है और एक घुमावदार सड़क के माध्यम से पहुँचा जा सकता है. उज्जैन जंक्शन निकटतम रेलवे स्टेशन है. मंगल (Mars), नौ ग्रहों में से एक ग्रह है. मंगल (Mars) अंगारक तथा कुज के नाम से भी जाना जाता है. वैदिक एवं पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान मंगल की माता पृथ्वी देवी है | वह शक्ति, वीरता और साहस के साथ जुड़ा हुआ है | मंगलनाथ मंदिर कर्क रेखा पर स्थित है और इसे भारत वर्ष का नाभि स्थल भी कहा जाता है |

मंगल पूजा
मंगल पूजा और अनुष्ठान का उद्देश्य बाधाओं को हटाना है, जो मंगल दोष की शांति करके प्राप्त किया जाता है | विशिष्ट पूजा के द्वारा हम हानिकर बल से छुटकारा, सुख, शांति और समृद्धि पा सकते है | नए उद्यम शुरू करने में सकारात्मक कंपन पैदा करने के लिए, घर, नौकरी, व्यवसाय में बाधाएं दूर करने के लिए, शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए, नेतृत्व कौशल बढ़ाने के लिए हम साधना करके लाभ बढ़ा सकते हैं | सामान्य तरीकों में ध्यान, मंत्र जप, शांति, प्रार्थना शामिल हैं | उपवास या भगवान का नाम जप, धर्मदान. ये मनोरथ से किया जा सकता है | मंगल पूजा, मंगल ग्रह के लिए समर्पित है | मंगल शांति पूजा ऋण, गरीबी और त्वचा की समस्याओं से राहत के लिए लाभकारी है | इन कार्यों के परिणाम के लिए सक्षम हो हमें और अधिक गहरा आध्यात्मिक पूजा द्वारा लागू ऊर्जा आत्मसात करने के लिए मंगल पूजा करने की ज़रूरत है |

उज्जैन
उज्जैन को उज्जैनी और अवंतिकापुर के नामो से भी जाना जाता है | यह प्राचीन शहर, मध्य-भारत के मालवा प्रान्त के देवतुल्य
शिप्रा नदी के तट पर स्थित है | आज यह मध्य-प्रदेश का अंग है |
प्राचीन काल में इस शहर को उज्जैनी के नाम से जाना जाता था | महान महाभारत के काव्यलेख में भी हमें उज्जैनी का उल्लेख
मिलता है, तब यह अवंती राज्य की राजधानी थी | चौथी शताब्दी इ. पु. के बाद इस स्थान को पृथ्वी का मध्यान माना गया,
तथा खगोलीय शाश्त्र के अध्यान के लिए उपयूक्त माना गया |
उज्जैन हिन्दुओ के सात पवित्र शहर ( सप्त-पूरी ) में से एक है | यह स्थान महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के लिए प्रसिद्द है,
तथा हर १२ वर्षो के पच्यात यह कुम्भ मेले का आयोजन होता है | इसी स्थान से भगवान श्री कृष्ण, बलराम तथा मित्र सुदामा
को महर्षि सांदीपनी से शिक्षा मिली |

Jyotishagya Pt. Vijay Bharti
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Expert in Krishna Murti Paddhati & Traditional Astrology